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क्या जमीनी हालात बदलेंगे शेष
May 6, 2019 • ASHOK YADAV

क्या जमीनी हालात बदलेंगे 

पाकिस्तानी आतंकवादी और जैश-ए- मुहम्मद के सरगना, मौलाना मसूद अजहर को सुरक्षा परिषद् ने ग्लोबल आतंकवादी घोषित कर दिया है। दस साल की मशक्कत के बाद अमेरिका, प्रंस और ब्रिटेन को यह सफलता मिली। 2009 से ही यह कोशिश चल रही थी। चीन ने बार- बार प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया और मसूद अजहर बच निकलता था। लेकिन इस बार चीन ने भी अपनी सहमति दे दी। लेकिन सहमति देने के पहले प्रस्ताव के उन हिस्सों को निकलवा दिया जिसमें पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र था। जबकि उसके संगठन जैश-ए- मुहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी। चीन की शायद कोशिश यह थी कि वह इस काम का श्रेय भारत को न लेने दे लेकिन उसको मुगालता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खबर आते ही जयपुर की एक चुनावी सभा में इसका श्रेय ले लिया और मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में हुई कार्रवाई को अपनी सफलता बता दिया। इसके पहले जब भी कोशिश हुई, चीन अडंगा लगा देता था और तर्क यह देता था अभी मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित करने के लिए देशों में आम राय नहीं बन पाई है जबकि सच्चाई यह है कि पाकिस्तान के अलावा कोई भी देश उसको बचाना नहीं चाहता था। लेकिन अब पाकिस्तान ने दावा किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के फैसले को पूरी तरह लागू करेगा। ग्लोबल आतंकवादी घोषित होने के बाद मसूद अजहर के सारे बैंक खाते बंद कर दिए जाने चाहिए, उसको हथियार रखने से रोका जाना चाहिए और उसकी यात्राओं पर रोक लगा दी जानी चाहिए। लेकिन जानकार बताते हैं कि पाकिस्तान ऐसा कुछ नहीं करेगा। दुनिया ने देखा है कि हाफिज सईद भी ग्लोबल आतंकी घोषित होने के बाद पाकिस्तान में पूरी शानो -शौकत से रह रहा है। मसूद अजहर पुलवामा के हमले का मुख्य साजिशकर्ता है। इसके पहले हुई वारदातों में वह शामिल रहा है। भारत की संसद पर हुए आतंकवादी हमले का मुख्य साजिशकर्ता तो है ही पठानकोट हमले में भी उसका हाथ रहा है। मसूद अजहर 1994 में कश्मीर आया था जहां उसको गिरफ्तार कर लिया गया था। उसको रिहा करवाने के लिए अल फन नाम के एक आतंकी गिरोह ने कुछ सैलानियों का अपहरण कर लिया था लेकिन उसको रिहा करवाने में नाकाम रहे थे। बाद में उसके भाई की अगुवाई में आतंकवादियों ने नेपाल से दिल्ली आ रहे एक विमान को हाइजैक करके कंधार में उतारा और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को मजबूर कर दिया कि उसको रिहा करें। उस दौर के विदेशमंत्री जसवंत सिंह मसूद अजहर सहित कुछ और आतंकवादियों को लेकर कंधार गए और विमान और यात्रियों को वापस लाए। और इस तरह मसूद अजहर जेल से छूटने में सफल रहा। उसका जेल से छूटना भारतीय सरकार की बड़ी असफलता थी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और लालकृष्ण आडवानी गृहमंत्री। फैसला सरकार ने किया था लेकिन आडवानी सारी गलती वाजपेयी के सर मढ़ने की कोशिश करते रहते थे। लालकृष्ण आडवानी ने सरकार से हटने के बाद एक किताब लिखी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि कंधार कांड में जो राष्ट्रीय अपमान हुआ था, उससे सबसे भयानक मुसीबत के दौर से गुजर रहा है। खास चेला हुआ करता था। बाद में उसने ही अमेरिका उसके बाद वहां धार्मिक लोगों की ताकत बढ़ने लगी। उनका कोई लेना-देना नहीं था, उन्हें मालूम ही नहीं आतंकवाद का भस्मासुर उसे निगल जाने की तैयारी पर आतंकवादी हमला करवाया और पाकिस्तान की धर्म के सहारे राजनीति करने वालों ने फैज को बहुत था कि जसवंत सिंह आतंकवादियों को लेकर कंधार में है। देश के हर बड़े शहर को आतंकवादी अपने हिफजत में आ गए जहां अमेरिका ने उसे पाकिस्तानी महत्व देना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि जब जा रहे हैं। प्रधानमंत्री पद के लालच में उन्होंने अपने हमले का निशाना बना चुके हैं। पाकिस्तान का फैज की नाक के नीचे से पकड़ा और मार डाला। संविधान बना तो फैज देश की राजनीतिक सत्ता पर आपको राष्ट्रीय शर्म की इस घटना से अलग कर लिया विखंडन हुआ तो उसके इतिहास में बांग्लादेश की ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अमेरिका की कंट्रोल कर चुकी थी। जैसा आजकल भारत में है उसी था। जबकि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा की मंत्रिमंडलीय स्थापना के बाद यह सबसे बड़ा झटका माना जाएगा। विदेश नीति में पाकिस्तान के प्रति रुख में खासा तरह धार्मिक जमातों का प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ रहा समिति में लिया गया। यह समिति सरकार की सबसे अजीब बात यह है कि पड़ोसी देशों में आतंकवाद को बदलाव आया है। आज हालात यह हैं कि पाकिस्तान था। पाकिस्तान के इतिहास में एक मुकाम यह भी ताकतवर संस्था है। इसमें प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं हथियार की तरह इस्तेमाल करने के चक्कर में अपने अस्तित्व की लड़ाई में इतनी बुरी तरह से उलझ आया कि सरकार के मुखिया को नए देश को इस्लामी और गृहमंत्री, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री और विदेशमंत्री पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार हो गया है और चुका है कि उसके पास और किसी काम के लिए राज्य घोषित करना पड़ा। पाकिस्तान में अब तक चार सदस्य होते हैं। इसे एक तरह से सुपर कैबिनेट भी अपने अस्तित्व को ही दांव पर लगा दिया है। फुर्सत ही नहीं है। आर्थिक तबाही के कगार पर खड़े फैजी तानाशाह हुकूमत कर चुके हैं लेकिन पाकिस्तानी कहा जा सकता है। कंधार में फंसे आईसी-814 विमान पाकिस्तानी हुक्मरान को बहुत दिन तक मुगालता था पाकिस्तान के पास सऊदी अरब और चीन से क़र्ज के समाज और राज्य का सबसे बड़ा नुक्सान जनरल को वापस लगाने के लिए तीन आतंकवादियों को कि आसपास के देशों में आतंक फैला कर वे अपनी सिवा आर्थिक जंजाल से बचने का और कोई तरीका जिया-उल-हक ने किया। उन्होंने पाकिस्तान में फैज छोड़ने का फैसला इसी कमेटी में लिया गया था। अब राजनीतिक ताक़त बढ़ा सकते थे। जब अमेरिका की नहीं है। यह याद करना दिलचस्प होगा कि भारत जैसे और धार्मिक अतिवादी गठजोड़ कायम किया जिसका पता लग रहा है कि फैसला एकमत से लिया गया था मदद से पाकिस्तानी तानाशाह, जनरल जिया उल हक बड़े देश से पाकिस्तान की दुश्मनी का आधार, कश्मीर खामियाजा पाकिस्तानी समाज और राजनीति आज यानी अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवानी, आतंकवाद को अपनी सरकार की नीति के रूप में है। वह कश्मीर को अपना बनाना चाहता है लेकिन तक झेल रहा है। पाकिस्तान में सक्रिय सबसे बड़ा जॉर्ज फर्नाडीस, यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह सब विकसित कर रहे थे, तभी दुनिया भर के समझदार आज वह इतिहास के उस मोड़ पर खड़ा है जहां से आतंकवादी हाफिज सईद जनरल जिया की ही की राय थी कि आतंकवादियों को छोड़ देना चाहिए। लोगों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि आतंकवाद की आग उसको कश्मीर पर कब्जा तो दूर, अपने चार राज्यों को पैदावार है। हाफिज सईद तो मिस्र के काहिरा आडवानी इस मसले से अपने को अलग कर रहे थे उनके देश को ही लपेट सकती है। लेकिन उन्होंने बचा कर रख पाना ही टेढ़ी खीर नजर आ रही है। विश्वविद्यालय में दीनियात का मास्टर था। और यह माहौल बना रहे थे कि उनकी जानकारी के किसी की नहीं सुनी जनरल जिया ने धार्मिक कश्मीर के मसले को जिंदा रखना पाकिस्तानी शासकों उसको वहां से लाकर जिया ने अपना धार्मिक बिना ही यह महत्वपूर्ण फैसला ले लिया गया था। उन्मादियों और फैज के जिद्दी जनरलों की सलाह से की मजबूरी है। मसूद अजहर और उसी की तरह के सलाहकार नियुक्त किया। धार्मिक जमातों और मंत्रिमंडल में उनके बाकी साथी आडवानी की इस देश के बेकार फिर रहे नौजवानों की एक जमात बनाई अन्य आतंकवादी हाफिज सईद और सैय्यद सलाहुद्दीन फैज के बीच उसी ने सारी जुगलबंदी करवाई चालाकी से नाराज थे। बाद में जार्ज फर्नाडीस,यशवंत थी जिसकी मदद से उन्होंने अफानिस्तान और भारत जैसे लोगों के चलते पाकिस्तान की छवि बाकी दुनिया और आज आलम यह है कि दुनिया में कहीं भी सिन्हा और जसवंत सिंह ने आडवानी के झूठ को में आतंकवाद की खेती की थी। उसी खेती का जहर में एक असफल राष्ट्र की बन चुकी है। अपने अस्तित्व आतंकवादी हमला हो, शक की सुई सबसे पहले उजागर कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी बहुत आज पाकिस्तान के अस्तित्व पर सवालिया निशान की लड़ाई लड़ रहे पाकिस्तान में आतंकवादियों का पाकिस्तान पर ही जाती है। आज पाकिस्तान एक बीमार थे वरना शायद वह भी अपनी बात कहते। बन कर खड़ा हो गया है। अमेरिका की सुरक्षा पर भी इतना दबदबा कैसे हुआ, यह समझना कोई मुश्किल दहशतगर्द और असफल कौम है और आने वाले बहरहाल मसूद अजहर का छोड़ा जाना हमारी उसी आतंकवाद का साया मंडरा रहा है जो पाकिस्तानी नहीं है। पाकिस्तान की आजादी के कई साल बाद तक वक्त में उसके अस्तित्व पर सवाल बार-बार विदेशनीति पर बदनुमा दाग है। और उसको स्वीकार हुक्मरानों की मदद से स्थापित किया गया था। दुनिया वहां संविधान नहीं तैयार किया जा सका था। उठेगा। पाकिस्तान को अपने राष्ट्रहित का ध्यान किया जाना चाहिए। पाकिस्तान ने आतंकवाद को जानती है कि अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन, पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की बहुत रखते हुए आतंकवादियों को संरक्षण देने से बाज अपना हथियार बनाकर बहुत बड़ी गलती की है। अलकायदा, अमेरिकी पैसे से ही बनाया गया था और जल्दी मौत हो गई और सहारनपुर से गए और नए देश आना चाहिए वरना उसकी तबाही की रफ्तार और नतीजा यह है कि वह अपने 70 साल के इतिहास में उसका संस्थापक ओसामा बिन लादेन अमेरिका का प्रधानमंत्री लियाक़त अली को क़त्ल कर दिया गया। तेज हो जायगी।