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अधिकारी की आत्महत्या के लिए तीन में से कौन सा सीएम जिम्मेदार : राकेश सिंह                
December 20, 2019 • राहुल यादव

 भोपाल। छिंदवाड़ा में एक अधिकारी को सिर्फ इसलिए आत्महत्या करनी पड़ती है कि आपका कलेक्टर उसके ऊपर फर्जी नियुक्ति के लिए दबाव डालता है। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और कुछ नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री कमलनाथ को प्रदेश की जनता को जवाब देना चाहिए कि आत्महत्या के हालात पैदा करने के लिए यदि आप जिम्मेदार नहीं हैं, तो फिर आप तीन मुख्यमंत्रियों में से कौन इसके लिए जिम्मेदार है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से चर्चा करते हुए कही।

क्या यही है छिंदवाड़ा का विकास मॉडल?

                प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि आजकल बात-बात में छिंदवाड़ा के विकास मॉडल की चर्चा की जाती है। क्या है छिंदवाड़ा का विकास मॉडल ? छिंदवाड़ा में पदस्थ अधिकारी प्रवीण मरावी जो अनुसूचित जनजाति से आते हैं, ने गुरुवार को आत्महत्या कर ली। उनके परिजनों का कहना है कि कलेक्टर उन पर एक अनुचित नियुक्ति के लिए दबाव बना रहे थे। जब मरावी ने इसके लिए असमर्थता जताई, तो उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। बार-बार नियुक्ति के लिए दबाव डाले जाने से परेशान अधिकारी प्रवीण मरावी ने गुरुवार को आत्महत्या कर ली। उनकी बहन और परिजन चीख-चीखकर इसके लिए कलेक्टर को जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं, छिंदवाड़ा मुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसलिए इस संदेह का पर्याप्त आधार है कि कलेक्टर को मुख्यमंत्री से ऐसे निर्देश मिले हों। इसलिए आज प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि आप बात-बात पर जिस छिंदवाड़ा मॉडल की बात करते हैं, क्या हो रहा है वहां पर?  वहां कानून व्यवस्था की क्या हालत है?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं मान रही कांग्रेस सरकार

                मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार किस तरह से चल रही है, यह इस बात से पता चलता है कि अभी-अभी माननीय उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार पर 10 लाख रूपए का जुर्माना लगाया है। कारण यह है कि बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के लिए पॉस्को एक्ट के बारे में जो निर्देश माननीय उच्चतम न्यायालय ने दिये थे, उनका पालन मध्यप्रदेश में नहीं किया जा रहा है। इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और क्या हो सकती है कि प्रदेश में एक तरफ जहां अपराध बढ़ रहे हैं, वहीं महिलाओं और बच्चों के साथ हो रहे अपराधों को लेकर मध्यप्रदेश सरकार गंभीर नहीं है। यह बात उच्चतम न्यायालय ने कही है और 10 लाख रूपए का जुर्माना लगाया है। इससे ज्यादा शर्मनाक स्थिति और क्या होगी?

डर के माहौल में काम कर रहे अधिकारी

राकेश सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में एक सीनियर आईएएस अधिकारी गौरी सिंह ने इस्तीफे की पेशकश की है। इसका कारण यह है कि उनके ऊपर ऐसे कार्य करने के लिये दबाव डाला जाता है, जो वह नहीं करना चाहती। यह सरकार हिटलरशाही के साथ चल रही है। पूरे प्रदेश के अधिकारी व कर्मचारी डर के माहौल में कार्य कर रहे हैं। उनको डर है कि कब उनका तबादला कर दिया जाएगा, कब उन्हें काम से हटा दिया जाएगा और इसलिए चाहे उचित हो या अनुचित हो, दोनों तरह की बातों को स्वीकार करने के लिए मध्यप्रदेश के अधिकारी व कर्मचारी मजबूर हैं। लेकिन प्रदेश के अधिकारियों से भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि कांग्रेस की सरकार के दबाव में आकर कोई भी ऐसे कार्य मत करिए, जिससे जनता का उत्पीड़न होता हो या अन्याय होता हो। अन्यथा भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की जनता के साथ और अपने कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनता के हित की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।