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एम्बुलेंस ड्राइवर ने फर्जी कागजों के सहारे कोरोना मरीज को दिल्ली से गोरखपुर पहुंचाया
April 28, 2020 • मनोज श्रीवास्तव

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। एम्बुलेंस ड्राइवर ने दिल्ली से फर्जी कागजातों के सहारे कोरोना रोगी को 800 किमी गोरखपुर पहुंचा दिया।एम्बुलेंस ड्राइवर के इस दांव से पूरी व्यवस्था चकमा खा गयी। मामला तब सामने आया जब उक्त व्यक्ति को गांव में कोरोना के लक्षण की पुष्टि हुई। इस मामले में एसएसपी गोरखपुर डॉ सुनील गुप्ता ने कड़ा कदम उठाया है। अब पुलिस एम्बुलेंस गिरोह को दबोचने का जाल बिछा रही है, लेकिन अभी भी उसके हाथ खाली हैं। एसएसपी ने
सहजनवां थाने के सामने बने बैरियर पर तैनात दरोगा शंभू सिंह, सिपाही नंदलाल गौड़ तथा नंद किशोर पाण्डेय को सोमवार को सस्पेंड कर दिया। आरोप है कि उन्होंने उस एंबुलेंस को नहीं रोका था जिससे कोरोनाग्रस्त व्यक्ति व अन्य उरूवा पहुंच गए थे। जबकि पुलिस कर्मियों का कहना था कि उन्होंने गाड़ी को रोकी थी पर अन्य गाड़ियों की आड़ में धीरे-धीरे एंबुलेंस निकल गई थी। बता देें कि गोरखपुर जिले की उरूवा के हाटा बुजुर्ग गांव निवासी व्यक्ति को दिल्ली स्थित सफदरगंज हास्पिटल से एंबुलेंस से ले आया गया था। इस संदर्भ में उरुवा के थानेदार ने बताया कि इसके संपर्क में आये 16 व्यक्ति और 2 अन्य को गोरखपुर मुख्यालय पर बने सेंटर में कोरेन्टीन कर दिया गया है।मंगलवार की सुबह सबकी रिपोर्ट निगेटिव आयी है।रविवार की दोपहर में उसकी एंबुलेंस गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन पर सहजनवां थाने के सामने बने बैरियर को क्रास की थी। उस समय एसआई शंभू सिंह, सिपाही नंदलाल गौड़ और नंदकिशोर के अलावा दो होमगार्ड की ड्यूटी थी। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की टीम और विशेष मजिस्ट्रेट भी तैनात थे। शनिवार की रात में यह एंबुलेंस मरीज लेकर चली थी। एंबुलेंस के चालक ने हार्ट के मरीज परचा रखा था। एम्बुलेंस चालक गलत कागज बनाने की रणनीति के चलते गन्तव्य तक पहुंच गया। उसे रास्ते मे कहीं दिक्कत नहीं हुई।सहजनवां थाने की पुलिस का कहना था कि उन्होंने एंबुलेंस को रोका था लेकिन वे अन्य गाड़ियों के पीछे-पीछे धीरे-धीरे निकल गई। जब जानकारी हुई तब वह जा चुकी थी। फिलहाल उन्होंने इसकी खबर आगे कहीं नहीं की थी। एसएसपी ने इसमें लापरवाही सामने आने पर तीनों पुलिस कर्मियों को निलम्बित कर दिया है। यूपी पुलिस के आला अधिकारी अभी तक उन जिले के पुलिस अधिकारियों से क्या पूंछ-तांछ किये इसका विवरण नहीं मिल पा रहा है। चूंकि मुख्यमंत्री के जिले से मामला जुड़ा है इस लिये सबके कान खड़े हैं। प्रश्न यह है कि दिल्ली-यूपी सीमा पर कैसी व्यूह रचना बनाये हैं कि दिल्ली से कोरोना पीड़ित एम्बुलेंस में बैठ कर 800 किमी चला आया और वह उसकी सही जांच नहीं कर पाये। थोड़े दिन पहले एक नेशनल चैनल ने दिल्ली के एम्बुलेंस रैकेट का स्टिंग रिपोर्ट दिखाया था। जिसमें यह दिखाया गया था कि कैसे दलाल फर्जी मरीज का पर्चा बनवा कर एम्बुलेंस द्वारा लोगों की गंतव्य तक पहुंचा रहे हैं। यदि दिल्ली सीमा पर जांच-पड़ताल हो जाती तो यह कोरोनाग्रस्त व्यक्ति गोरखपुर नहीं पहुंच पाता।गोरखपुर के एसएसपी ने कार्यवाही करके अच्छा संदेश दिया है। उन्होंने दोका सामना को बताया कि जिले की सीमाओं पर लापरवाही का ही नतीजा है कि बिना जांच के एंबुलेंस उरूवा तक पहुंच गई। इस मामले में बैरियर ड्यूटी पर मौजूद पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा अन्य जिले के सीमा क्षेत्र के बैरियर पर मौजूद पुलिस कर्मियों को भी साफ निर्देश दिया गया है कि वे बिना जांच के किसी को भी जिले में न आन न दें। अन्य जिलें के कुछ कर्मचारियों के आने-जाने की बात भी सामने आई है उन पर भी सख्ती करने को कहा गया है।