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कोरोना की केमिस्ट्री को समझते हुए ट्रीटमेंट करने की आवश्यकता : योगी आदित्यनाथ
May 9, 2020 • राहुल यादव • लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने राजस्व प्राप्ति की समस्त सम्भावनाओं पर कार्य करने पर बल दिया है । उन्होंने कहा कि कोविड - 19 से आर्थिक गतिविधियों प्रभावित हुई हैं । इसलिए राजस्व वृद्धि के वैकल्पिक स्रोत चिन्हित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए । मुख्यमंत्री  आज लॉकडाउन व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे । उन्होंने कहा कि प्रवासी कामगारों / श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए वृहद कार्ययोजना बनाई जाए । महिला स्वयं सहायता समूह के लिए व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं । इन समूहों की सदस्यों को रेडिमेड कपड़े तथा स्वेटर आदि तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए । मुख्यमंत्री  ने कहा कि कोरोना की केमिस्ट्री को समझते हुए ट्रीटमेंट करने की आवश्यकता है । यह भी महत्वपूर्ण है कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कोरोना से बचा जा सकता है । प्रदेश सरकार द्वारा लॉन्च किए गए ' आयुष कवच - कोविड एप में जड़ी - बूटियों पर आधारित आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से जुड़ी उपयोगी जानकारियों का समावेश किया गया है , जिन्हें अपनाकर लोग अपनी इम्युनिटी को विकसित कर सकते हैं । इसके दृष्टिगत ' आयुष कवच - कोविड ' एप का व्यापक प्रचार - प्रसार कर लोगों को इसे डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए । मुख्यमंत्री  ने कोविड - 19 के खिलाफ जंग तथा इस महामारी से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सरकारी विभागों , निगमों एवं अन्य संस्थानों के कार्मिकों द्वारा किए जा रहे कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए आगे भी इसी प्रकार प्रतिबद्ध होकर कार्य करने के निर्देश दिए हैं । उन्होंने कहा कि 18 करोड़ लोगों को तीन चरणों में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा चुका है । यह एक बहुत बड़ा कार्य है , क्योंकि 18 करोड़ तो कई देशों की आबादी भी नहीं है । बैठक में मुख्यमंत्री  को अवगत कराया गया कि प्रदेश में कोविड - 19 के मरीजों की रिकवरी की दर 42 प्रतिशत है । यह संख्या रिकवरी की राष्ट्रीय औसत 29 . 2 प्रतिशत से लगभग 13 प्रतिशत अधिक है । एल - 1 , एल - 2 तथा एल - 3 कोविड चिकित्सालयों के 52 , 000 बेड के क्षमता विस्तार के लक्ष्य के सापेक्ष 53 , 400 बेड की व्यवस्था कर ली गई हैं । पूल टेस्टिंग में प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है । मुख्यमंत्री  ने कहा कि मेडिकल इंफेक्शन से सुरक्षा के लिए डॉक्टरों तथा अन्य चिकित्सा कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार संचालित किए जाएं । डिग्री व इण्टर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों व शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाए , जिससे यह लोग आमजन को जागरूक कर सकें । समस्त मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों तथा सभी जनपदों में डिप्टी सी0एम0ओ0 से भी नियमित संवाद किया जाए । सभी जनपदों में पी0पी0ई0 किट तथा एन - 95 मास्क की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए । उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं के संचालन की अनुमति सम्बन्धित जिलाधिकारी तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी की कमेटी प्रदान करेगी । कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि इमरजेंसी सेवा प्रदान करने जा रहे चिकित्सालय में मेडिकल इंफेक्शन से सुरक्षा के सभी उपाय लागू हो गए हैं तथा अस्पताल की मेडिकल टीम को संक्रमण से बचाव के सम्बन्ध में प्रशिक्षित कर दिया गया है ।